श्री राकेश दुबे का पत्रकारीय व वैचारिक जीवन
हिंदी पत्रकारिता की प्रत्येक विधा में अपनी तीक्ष्ण लेखनी का लोहा मनवाने वाले लब्ध-प्रतिष्ठित वरिष्ठ पत्रकार श्री राकेश दुबे का जन्म २२ दिसंबर १९६५ को उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले के ऐतिहासिक ग्राम बहरी (नेवढ़िया बा़जार) में हुआ। ३० से अधिक वर्षों का दीर्घ और उत्कृष्ट पत्रकारिता अनुभव रखने वाले श्री राकेश दुबे ने अपने व्यावसायिक पत्रकारीय जीवन की शुरुआत वर्ष १९८५ में एक स्वतंत्र लेखक व खोजी पत्रकार के रूप में की थी।
पत्रकारिता का विहंगम सफर: अपनी विलक्षण संपादन क्षमता के कारण राकेश दुबे ने मुंबई से प्रमुख दैनिक समाचार पत्र 'प्रातः काल' को स्थापित व सुव्यवस्थित रूप से प्रकाशित करवाने में अत्यंत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहाँ उन्होंने लंबे समय तक बतौर सहायक संपादक कार्यभार संभाला। इसके पश्चात् वे देश के सर्वश्रेष्ठ वैचारिक एवं निष्पक्ष हिंदी दैनिक 'जनसत्ता' (इंडियन एक्सप्रेस समूह) से बतौर पत्रकार, उपसंपादक एवं वरिष्ठ उपसंपादक के रूप में १२ गौरवशाली वर्षों तक जुड़े रहे, जहाँ उनकी राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय समीक्षात्मक रिपोर्ट्स काफी लोकप्रिय रहीं।
विविध आयाम व कला-संस्कृति संवर्धन: उन्होंने राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के शीर्ष समाचारपत्रों (जनसत्ता, नवभारत टाइम्स, दैनिक हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, स्वतंत्र भारत, आज) तथा सामाजिक एवं साहित्यिक पत्रिकाओं (जैसे सरिता, मुक्ता, साप्ताहिक हिंदुस्तान समय) में कला-संस्कृति, समाज और जीवन के विभिन्न पहलुओं एवं संवेदनाओं पर निरंतर स्तंभ लेखन, संपादकीय वैचारिकी एवं सूक्ष्म विश्लेषण लिखे। प्रिंट मीडिया के अलावा उन्होंने टीवी पत्रकारिता में हाथ आजमाया तथा सुदर्शनम व दर्शन कृपा पत्रिकाओं का संपादन संभाला, साथ ही जी.टी.वी. के सिटी केबल नेटवर्क के लिए विभिन्न सामयिक समाचार आधारित कार्यक्रमों का निर्माण किया। उन्होंने आकाशवाणी (ऑल इंडिया रेडियो) के लिए विचारोत्तेजक साहित्यिक फीचर्स भी तैयार किए।
सम्मान व राष्ट्रीय अलंकरण: कारगिल युद्ध के ऐतिहासिक महानायक कर्नल ललित राय के कर-कमलों द्वारा राकेश दुबे को उनके राष्ट्रीय सरोकार एवं निर्भीक रिपोर्टिंग के लिए प्रतिष्ठित कारगिल वीर सम्मान व श्रेष्ठ पत्रकारिता पुरस्कार से अलंकृत किया गया है। इसके अलावा उन्हें राज्य स्तरीय विभिन्न शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अनेक बार मानद उपाधियों से सम्मानित किया जा चुका है।
वर्तमान में वे राष्ट्रीय हिंदी पाक्षिक 'संतुलन' के महाराष्ट्र संस्करण के सम्मानित कार्यकारी संपादक हैं। इसके साथ ही 'परिचय भारत प्रतिष्ठान' के संस्थापक न्यासी, 'सरयू फाउंडेशन चैरितकेबल ट्रस्ट' के संस्थापक अध्यक्ष एवं 'मानव धर्माचरण समिति' के कार्याध्यक्ष के तौर पर सामाजिक चेतना और दीन-दुखियों की सेवा का अनुकरणीय अभियान चला रहे हैं।