अशोक त्रिपाठी
परिचय के लिए प्रतीक्षा करें। संपादन कविताएँ
- देश-देश की कविता
- कहें केदार खरी खरी
- कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
- जमुन जल तुम
- जो शिलाएँ तोड़ते हैं
- वसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी
- केदारनाथ अग्रवाल संचयिता