साहित्य गंगा

केदारनाथ अग्रवाल

परिचय
जन्म : 01 अप्रैल 1911, कमासिन, बाँदा (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता, आलोचना, संस्मरण, पत्र
मुख्य कृतियाँ
कविता संग्रह : युग की गंगा, फूल नहीं रंग बोलते हैं, पंख और पतवार, गुलमेंहदी,  हे मेरी तुम!, बोले बोल अबोल, मार प्यार की थापें, अपूर्वा, अनहारी हरियाली, आग का आइना, आत्मगंध, खुली आँखें खुले डैने, पुष्प दीप और बंबई का रक्त स्नान (आल्हा)। कहें केदार खरी खरी, कुहकी कोयल, खड़े पेड़ की देह, जमुन जल तुम, जो शिलाएँ तोड़ते हैं, वसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी (सभी अशोक त्रिपाठी के संपादन में) आलोचना : विचार बोध, विवेक विवेचना, समय समय पर संस्मरण : बस्ती खिले गुलाबों की (रूस यात्रा के संस्मरण) पत्र : मित्र संवाद - 1, मित्र संवाद - 2 (केदारनाथ अग्रवाल और रामविलास शर्मा के पत्रों का संकलन) अनुवाद : देश-देश की कविता (पाब्लो नेरूदा और अन्य कवियों की कविताओं के अनुवाद)
सम्मान : साहित्य अकादमी पुरस्कार
निधन : 22 जून 2000

रचनाएँ

कविताएँ
  • देश-देश की कविता
कविता संग्रह
  • अपूर्वा
  • आग का आइना
  • आत्मगंध
  • कहें केदार खरी खरी
  • कुहकी कोयल खड़े पेड़ की देह
  • खुली आँखें खुले डैने
  • गुलमेंहदी
  • जमुन जल तुम
  • जो शिलाएँ तोड़ते हैं
  • पंख और पतवार
  • पुष्प दीप
  • फूल नहीं रंग बोलते हैं
  • बंबई का रक्त स्नान (आल्हा)
  • बस्ती खिले गुलाबों की
  • बोले बोल अबोल
  • मार प्यार की थापें
  • वसंत में प्रसन्न हुई पृथ्वी
  • मेरी तुम
केदारनाथ अग्रवाल समग्र कविता संकलन
  • अनहरी हरियाली
आलोचना
  • विचार बोध
  • विवेक विवेचना
  • समय समय पर
पत्र
  • केदारनाथ अग्रवाल समग्र
  • पत्र
  • मित्र संवाद
संस्मरण
  • संस्मरण
  • बस्ती खिले गुलाबों की
संचयिता
  • केदारनाथ अग्रवाल संचयिता
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