साहित्य गंगा

जितेंद्र श्रीवास्तव

परिचय
जन्म : 8 अप्रैल 1974, सिलहटा, रूद्रपुर तहसील, देवरिया (उत्तर प्रदेश) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता, आलोचना
मुख्य कृतियाँ
कविता संग्रह : इन दिनों हालचाल, अनभै कथा, असुंदर-सुंदर, बिलकुल तुम्हारी तरह, कायांतरण आलोचना : भारतीय समाज, राष्ट्रवाद और प्रेमचंद, शब्दों में समग्र, आलोचना का मानुष मर्म, सर्जक का स्वप्न, विचारधारा, नए विमर्श और समकालीन कविता, उपन्यास की परिधि संपादन : प्रेमचंद : स्त्री जीवन की कहानियाँ, प्रेमचंद : स्त्री और दलित विषयक विचार, प्रेमचंद : हिंदू-मुस्लिम एकता संबंधी कहानियाँ और विचार, प्रेमचंद : दलित जीवन की कहानियाँ, प्रेमचंद : किसान जीवन की कहानियाँ, प्रेमचंद : स्वाधीनता आंदोलन की कहानियाँ, कहानियाँ रिश्तों की (परिवार), उम्मीद (साहित्यिक पत्रिका)
सम्मान
कृति सम्मान, रामचंद्र शुक्ल पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, विजयदेव नारायण साही पुरस्कार, डॉ रामविलास शर्मा आलोचना सम्मान, भारतीय भाषा परिषद 'कोलकाता’ का युवा पुरस्कार, देवीशंकर अवस्थी सम्मान
संपर्क
हिंदी संकाय, मानविकी विद्यापीठ, ब्लॉक – एफ, इग्नू, मैदानगढ़ी, नई दिल्ली-110068
फोन : 91-9818913798, 91-11-29535038
ई-मेल : jitendra82003@gmail.com, jitendra82003@yahoo.com
रचनाएँ
 कविताएँ
  • अपनों के मन का
  • अबकी मिलना तो !
  • इस गृहस्थी में
  • उम्मीद
  • एक घर था और एक सिनेमाघर
  • कैंची
  • कला
  • किसी ईश्वर से अधिक विराट
  • खेतों का अस्वीकार
  • गाँव का दक्खिन हो गया है "आखिरी आदमी"
  • घर प्रतीक्षा करेगा
  • चुप्पी का समाजशास्त्र
  • जब धर्म ध्वजाएँ लथपथ हैं मासूमों के रक्त से
  • जब हँसता है कोई किसान
  • जरूर जाऊँगा कलकत्ता
  • जैसे हाथ हो दायाँ
  • तमकुही कोठी का मैदान
  • तुम्हारे साथ चलते हुए
  • दृष्टिकोण
  • धीरे से कहती थी नानी
  • नींद
  • पत्नी पूछती है कुछ वैसा ही प्रश्न जो कभी पूछा था माँ ने पिता से
  • प्रकृति बचाती रहेगी पृथ्वी को निस्वप्न होने से
  • परवीन बाबी
  • मन की पृथ्वी
  • मन को उर्वर बनाने के लिए
  • माँ का सुख
  • रामदुलारी
  • लोकतंत्र का समकालीन प्रमेय
  • वे योद्धा हैं नई सदी के जो गा रहे हैं नई संस्कृति के सृजन का गीत
  • वह बहुत डरता है
  • विद्रोह
  • शुक्रिया मेरी दोस्त!
  • सुख
  • संजना तिवारी
  • सपने अधूरी सवारी के विरुद्ध होते हैं
  • सबसे हसीन सपने
  • स्मृतियाँ
  • साहब लोग रेनकोट ढूँढ़ रहे हैं
  • हिमपात
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