परिचय
जन्म : 3 जून 1844, इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)
भाषा : हिंदी
विधाएँ : कविता, निबंध, नाटक
मुख्य कृतियाँ
निबंध संग्रह : साहित्य सुमन, भट्ट निबंधावली
उपन्यास : नूतन ब्रह्मचारी, सौ अजान एक सुजान नाटक : दमयंती, स्वयंवर, बाल-विवाह, चंद्रसेन, रेल का विकट खेल अनुवाद : वेणीसंहार, मृच्छकटिक, पद्मावती
निधन : 20 जुलाई 1914
रचनाएँ व्यंग्य
निबंध - महाभारत के समय का भारत
- आत्म गौरव (Self Respect)
- आत्मत्याग
- आदि मध्य अवसान
- आय-व्यय
- आशा
- आँसू
- ईमानदारी
- कर्तव्य परायणता
- कल्पना शक्ति
- कवि और चितेरे की डाड़ा मेड़ी
- कष्टात्कष्टतरंक्षुधा
- कृष्ण की ईश्वरता निदर्शन
- काम और नाम दोनों साथ-साथ चलते हैं
- कौतुक
- कौम (Nation)
- ग्राम्य-जीवन
- ग्रामीण भाषा
| - चरित्र शोधन
- चरित्रपालन
- चारुचरित्र
- चित्त और चक्षु का घनिष्ठ संबंध
- ज्ञान और भक्ति
- जी
- तेजस्विता या प्रभुशक्ति
- द
- दृढ़ और पवित्र मन
- दल का अगुआ कैसा हो?
- देशत्व रक्षा का उपाय
- दिल बहलाव
- दौड़-धूप
- नई बात की चाह लोगों में क्यों होती है?
- नाक
- परचित्तानुरंजन
- प्रतिभा
- प्राचीन ग्रंथकार
| - पौगंड या कैशोर
- बड़ो का बड़प्पन
- बातचीत
- भारत का त्रिकाल
- भाषाओं का परिर्वतन
- मुग्ध माधुरी
- मन और नेत्र
- मन और प्राण
- मन के गुण
- मनुष्य के जीवन की सार्थकता
- मनुष्य की बाहरी आकृति मन की एक प्रतिकृति है
- महत्व
- माता का स्नेह
- माधुर्य
- मानना और मनाना
- राजा और प्रजा
- लक्ष्मी
- लोक एषणा
| - वेद क्या है?
- वर्तमान महादुर्भिक्ष
- वर्षारंभ
- वायु
- शब्दों की आकर्षण शक्ति
- श्री शंकराचार्य और गुरु नानकदेव
- सुख-दु:ख का अलग अलग विवेचन
- संग्राम
- सच्ची समालोचना
- स्त्रियाँ
- सुनीतितत्वशिक्षा क्यों आवश्यक है
- संसार में भलाई अधिक है कि बुराई
- सोना
- हृदय
- हम डार-डार तुम पात-पात
- हमारा दास्य भाव
- हमारी मृगतृष्णा
- हिंदू जाति का स्वाभाविक गुण
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