सुरजन परोही परिचय भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता रचनाएँ कविताएँ अंतस की गुलामी आजादी की गुलामी एक सत्य ऐंठन का दर्द कंचन बन जाऊँ कहाँ छिपकर बैठे हो कहाँ समाए मैलापन कहाँ है शांति का संदेश किनारों का किनारा कोयल की मीठी बोली गुलाब का सुख जीवन भर का उजाला जीवन-चरित दुनियावालों को राह दिखाता चल दरबार का बाजार दास कबीर अकेला था दो बित्ता कपड़ा धर्म-भक्त नदी के पानी में पहचाना नहीं पानी का एक सपना भूगर्भी-बीज मन का कोलाहल मेरे घर में है घोर अँधेरा रंग महल में दीप जले रहस्य-लोक रामायण रोय रोय बोले मैया रोशनी के लिए शांति-बोध सच्चा भक्त संत तुलसीदास की कथा सुनो सूरज स्वाभिमान संस्कार की बुनियाद सालगिरह मुबारक हर घड़ी हिंदी हमारी हिसाब-किताब साझा करें: Facebook Twitter ← सभी रचनाकार